January 10, 2025

Poem नूर के भी नूर

तुम्हें सहजता से कह दिया
जो कभी किसी से नहीं कहा
या पर्दा रखा नहीं
या पर्दा रहा नहीं

जो हो गया वो हो गया
कुछ सोच के किया नहीं
इस बात की खुशी नहीं
या कोई गिला नहीं

तू, मैं और लोग सब
इस नूर के भी नूर है
क्यों काल के ग्रास में अब
जीने को मजबूर हैं
 
रतीश
10 Jan 25
बिलासपुर 
© Ratish

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