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August 11, 2025

मेरा जुनून


एक तू है
एक तेरा फितूर
साथ है
कभी पास, कभी दूर
एक मैं हूंँ
एक मेरा जुनून
घुलता रगों में जैसे
धड़कन से खून 

© Ratish
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August 07, 2025

कौन है असल कौन असर


दीवानों सा ही अक्सर
देखते हैं जब देखते हैं

दुआ हो या कोई कहर
सोचते हैं तब सोचते है

मय हो या तुम हो ज़हर
जाम तेरा सिर आँखों पर

कौन है अस्ल कौन असर
कौन करे किसे मुकम्मल

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© Ratish

May 03, 2025

Hindi Poem कितना तन्हा हूंँ

जाने क्यों होती है सहर हर रात के बाद 
जाने क्या रह जाता है हर बात के बाद
तुझसे मिलकर मैं खुद से मिलता हूंँ
जाने क्या होता है मुलाकात के बाद 
अब तो अपना मिलना भी नहीं होता
कितना तन्हा हूंँ ऐसे हालात के बाद 

रतीश
3 May

© Ratish

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April 16, 2025

कोई मलाल मत रखना

मेरे जैसा तुम अपना हाल मत रखना
दिल में अपने कोई मलाल मत रखना
रखना सब संजोए जो भी होकर गुजरा
जो नहीं हुआ उसका ख्याल मत रखना

रतीश
16 Apr


© Ratish



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February 10, 2025

पूछ मत

तुम्हें क्या मिला मुझे क्या पता
मुझे क्या मिला ये पूछ मत
मैं चिराग सा अब भी जल रहा
तेरी नज़र का असर पूछ मत

© Ratish
10 Feb 25

January 22, 2025

Couplets पीछे पड़े सराब के

ख़्वाबों के पर लगे
हमें उड़ाकर ले गए
धरती पे खड़े सोचते
कि वो दिन किधर गए

पीछे पड़े सराब के
अमृत रखे रखे
हाँथों मे रेत पकड़े
धरती पे खड़े खड़े

सराब = mirage

रतीश
22-Jan-25
Bilaspur

© Ratish
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Couplets नुमायाँ

आसां तो नहीं होता है
मुश्किल भी नहीं होता
आंँखों में ख़्वाब का रहना
जो मुकम्मल नहीं होता

जब कुछ नहीं होता है
तब तू ही तो है रहता
लेकिन मेरे वजूद तलक
तू नुमायाँ नहीं होता

नुमायाँ = ज़ाहिर, व्यक्त, प्रत्यक्ष, राज़ खुल जाना

रतीश
21 Jan 25
Bilaspur
© Ratish

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January 21, 2025

Couplets ख़यालात

मेरे ख़यालात सिर्फ सोच है हकीकत तो नहीं
जहाँ कभी कुछ देखा था वहांँ कुछ भी नहीं
थी फिक्र के आसमां न गिरा हो तुम पर
है शुक्र लेकिन कभी ऐसा हुआ ही नहीं

रतीश
Bilaspur
20 Jan 25

© Ratish

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January 19, 2025

Couplets रिश्ते

बचाने के लिए सड़ जाने दें
या बनाने के लिए बिगड़ जाने दें
रिश्ते भी मांगते हैं पोषण तोषण
क्यों इन्हें वक्त के हाथों चढ़ जाने दें

रतीश
19 Jan 25
On train 

© Ratish

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January 08, 2025

Couplets अहसान कितने

गिन रहा था - हैं तेरे अहसान कितने 
चुन रह था समुद्रांत से पाषाण कितने
बेगैरत होकर जी ली है कितनी सांसें
न जाने रह गए हैं मेरे अरमान कितने

रतीश
8 Jan 25
बिलासपुर 

© Ratish

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January 07, 2025

Couplets दीदार

तेरा दीदार जबसे हो गया है
तेरा दीदार होता जा रहा है
इश्क़ जुनून सा हो गया है
जीव ब्रह्मांड सा हो रहा है

रतीश
7 Jan 25
बिलासपुर

© Ratish

January 06, 2025

Couplets तेरी चाह में

मैं कारवां के कोलाहल में
पूर्णतः गुम था
क्यों खुशबू तेरी कृपा की
मेरी राह से गुजरी

गुजर जाती ये ज़िंदगी
तेरे बिना भी लेकिन
हाय! क्या गुजरी है ये
जो तेरी चाह में गुजरी

रतीश
6 Jan 25
बिलासपुर 
© Ratish

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January 05, 2025

Couplets संजीदा

पहले जो कहते थे बहुत कुछ
अब थोड़े खामोश हो गए हैं
लबों से उनके कैसा शिकवा  
जब वो ही संजीदा हो गए हैं

रतीश
5 Jan 25
बिलासपुर





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© Ratish

January 04, 2025

Couplets

मुद्दतों बाद आज फिर आंँखें नम हैं
शायद कोई ख़याल घर आया होगा
दिल की सूखी पड़ी मिट्टी को
यादों के अब्र ने भिगोया होगा

अब्र=clouds

रतीश
4 Jan 25
बिलासपुर 

© Ratish

March 03, 2024

धीमे तीर सा

कुछ करते हैं कुछ हो जाता है
मिलता है कुछ कुछ खो जाता है

वक्त गुजरता हुआ धीमे तीर सा
जिंदगी के आर पार हो जाता है

रतीश
पूना
3rd March 24

© Ratish
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September 11, 2022

poem: जब कभी मैं अपने साथ होता हूँ

समय को है अपने होने की 
                                खबर 
कभी जब मैं उसके साथ 
                             होता हूँ 
ये वक्त ये समां निगल 
                            लेता हूँ 
जब कभी मैं अपने साथ 
                             होता हूँ 

© Ratish
बिलासपुर 

11th September 22


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May 14, 2022

तुझे क्या बताऊँ

तुझे क्या बताऊँ  ए दिलरुबा 
क्या इश्क़ है क्या है वफ़ा 
    जिसने चाहा उसे रुस्वा किया 
    जिसे चाहा उसे अपना लिया 

तुझे क्या बताऊँ ए जानेजाँ 
क्या मौज है क्या है सजा 
    जब दोनों तेरा है दिया हुआ 
    कोई एक चुनके क्या फ़ायदा 

 तुझे क्या बताऊँ ए हमनशीं 
ग़म है क्या क्या है ख़ुशी 
    ये दो ऑंखें तेरी मुझे देखती
    एक तू नज़र आती नहीं 

तुझे क्या बताऊं ए हमनफ़स 
हमदर्द तू  न गर हमसफ़र
    ना हो तू मेरा हांसिल यहाँ 
    रहने दे बस मुझे आश्ना  
 
    
रतीश 
बिलासपुर 
14th May 22
© Ratish


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May 13, 2022

मैं तेरे ही साथ साथ था

कभी दोस्ती कभी मयकशी 
    कहीं  रक़्स में कहीं अश्क़ में 
जिस ठौर भी मैं ठहर गया 
    मुझे वहाँ तेरा ही पता मिला 

कभी इल्म में कभी इश्क़ में 
    कभी कश्मकश या सुकून में 
लम्हों में जब भी बह गया 
    मैं तेरे ही साथ साथ था

रतीश 
बिलासपुर 
13th May 22



© Ratish
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December 25, 2021

Hindi Poem हिन्दी कविता: पुल

फिर मैं पुल पे चल रहा था
कभी रेत कभी पानी पे छाया
पंछी बसे पानी और नभ में
मिलती ही है यथार्थ से माया

जब पक्षी सतह पे उड़ते
बिम्ब प्रतिबिम्ब हमें दिखता
ऊंची अगर ये उड़ान हो तो
जाएगा कहां बनके ये साया
                                  रतीश
                                  25 Dec 21


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September 05, 2021

Hindi Poem और है क्या

सुन रहा हू़ॅं जिसे हर क्षण
गूंज तेरी है और है क्या
देखते हैं नयन जिसे हर कण
तू ही है और है क्या

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© Ratish
बिलासपुर
5 September 21