जाने क्यों होती है सहर हर रात के बाद
जाने क्या रह जाता है हर बात के बाद
तुझसे मिलकर मैं खुद से मिलता हूंँ
जाने क्या होता है मुलाकात के बाद
अब तो अपना मिलना भी नहीं होता
कितना तन्हा हूंँ ऐसे हालात के बाद
रतीश
3 May
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