May 03, 2025

Hindi Poem कितना तन्हा हूंँ

जाने क्यों होती है सहर हर रात के बाद 
जाने क्या रह जाता है हर बात के बाद
तुझसे मिलकर मैं खुद से मिलता हूंँ
जाने क्या होता है मुलाकात के बाद 
अब तो अपना मिलना भी नहीं होता
कितना तन्हा हूंँ ऐसे हालात के बाद 

रतीश
3 May

© Ratish

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