January 09, 2025

Poem निष्ठुर

सर्वस्व पल में देनेवाले
कतरा कतरा देता है क्यूंँ
या मेरा सामर्थ्य कम है
या बड़ा ही निष्ठुर है तू

मैं तुच्छ, अधम ही सही
महाकरुण तेरा स्वभाव है
छोड़ निराधार मुझको
कैसे तू निर्विकार है

करके, ना करके देख लिया
तैर के, बह के देख लिया
नए कर्मफल लगते नहीं सूखे अरण्यों में
सर्वस्व मेरा समर्पित तेरे निष्ठुर चरणों में

रतीश
9 Jan 25
बिलासपुर 

© Ratish


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