मैं कारवां के कोलाहल में
पूर्णतः गुम था
क्यों खुशबू तेरी कृपा की
मेरी राह से गुजरी
गुजर जाती ये ज़िंदगी
तेरे बिना भी लेकिन
हाय! क्या गुजरी है ये
जो तेरी चाह में गुजरी
पूर्णतः गुम था
क्यों खुशबू तेरी कृपा की
मेरी राह से गुजरी
गुजर जाती ये ज़िंदगी
तेरे बिना भी लेकिन
हाय! क्या गुजरी है ये
जो तेरी चाह में गुजरी
रतीश
6 Jan 25
बिलासपुर
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