April 02, 2025

तुम पूर्व स्वर्ण रश्मि

तुम पूर्व स्वर्ण रश्मि सम प्रखर
मैं मेघाच्छादित घनश्याम प्रिये
तुम चंदन का तरुण तरुवर
मैं उसपे लिपटा नाग प्रिये
तुम अलकनन्दा का शीतल जल
मैं प्रचण्ड दावानल की आग प्रिये
तुम जीवन का सुखमय पल
मै रुधिर की रिसती धार प्रिये
तुम आज मेरा, तुम बीता कल
तुम कल होने वाला प्यार प्रिये
बस डरता हूंँ कुछ कहने से
कहीं दो ना तुम दुत्कार प्रिये

रतीश
1 Apr
Bilaspur

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© Ratish

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