तुम पूर्व स्वर्ण रश्मि सम प्रखर
मैं मेघाच्छादित घनश्याम प्रिये
तुम चंदन का तरुण तरुवर
मैं उसपे लिपटा नाग प्रिये
तुम अलकनन्दा का शीतल जल
मैं प्रचण्ड दावानल की आग प्रिये
मैं मेघाच्छादित घनश्याम प्रिये
तुम चंदन का तरुण तरुवर
मैं उसपे लिपटा नाग प्रिये
तुम अलकनन्दा का शीतल जल
मैं प्रचण्ड दावानल की आग प्रिये
तुम जीवन का सुखमय पल
मै रुधिर की रिसती धार प्रिये
तुम आज मेरा, तुम बीता कल
तुम कल होने वाला प्यार प्रिये
मै रुधिर की रिसती धार प्रिये
तुम आज मेरा, तुम बीता कल
तुम कल होने वाला प्यार प्रिये
बस डरता हूंँ कुछ कहने से
कहीं दो ना तुम दुत्कार प्रिये
रतीश
1 Apr
Bilaspur
कहीं दो ना तुम दुत्कार प्रिये
रतीश
1 Apr
Bilaspur
#हिंदीpoetry #हिन्दी #poem #kavita #कविता #poetry #काव्य
No comments:
Post a Comment