मेरे ख़यालात सिर्फ सोच है हकीकत तो नहीं
जहाँ कभी कुछ देखा था वहांँ कुछ भी नहीं
थी फिक्र के आसमां न गिरा हो तुम पर
है शुक्र लेकिन कभी ऐसा हुआ ही नहीं
जहाँ कभी कुछ देखा था वहांँ कुछ भी नहीं
थी फिक्र के आसमां न गिरा हो तुम पर
है शुक्र लेकिन कभी ऐसा हुआ ही नहीं
रतीश
Bilaspur
20 Jan 25
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