January 22, 2025

Couplets पीछे पड़े सराब के

ख़्वाबों के पर लगे
हमें उड़ाकर ले गए
धरती पे खड़े सोचते
कि वो दिन किधर गए

पीछे पड़े सराब के
अमृत रखे रखे
हाँथों मे रेत पकड़े
धरती पे खड़े खड़े

सराब = mirage

रतीश
22-Jan-25
Bilaspur

© Ratish
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Couplets नुमायाँ

आसां तो नहीं होता है
मुश्किल भी नहीं होता
आंँखों में ख़्वाब का रहना
जो मुकम्मल नहीं होता

जब कुछ नहीं होता है
तब तू ही तो है रहता
लेकिन मेरे वजूद तलक
तू नुमायाँ नहीं होता

नुमायाँ = ज़ाहिर, व्यक्त, प्रत्यक्ष, राज़ खुल जाना

रतीश
21 Jan 25
Bilaspur
© Ratish

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January 21, 2025

Couplets ख़यालात

मेरे ख़यालात सिर्फ सोच है हकीकत तो नहीं
जहाँ कभी कुछ देखा था वहांँ कुछ भी नहीं
थी फिक्र के आसमां न गिरा हो तुम पर
है शुक्र लेकिन कभी ऐसा हुआ ही नहीं

रतीश
Bilaspur
20 Jan 25

© Ratish

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January 19, 2025

Couplets रिश्ते

बचाने के लिए सड़ जाने दें
या बनाने के लिए बिगड़ जाने दें
रिश्ते भी मांगते हैं पोषण तोषण
क्यों इन्हें वक्त के हाथों चढ़ जाने दें

रतीश
19 Jan 25
On train 

© Ratish

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January 14, 2025

Poem मकर संक्रान्ति

मकर संक्रान्ति विषेश 

पतंग, खिचड़ी तिल और गुड़
ओस-शीत मे घिरी थी प्रकृति 
माघ मास का सूर्य मकर में
उत्तरायण प्रवेश की पुनरावृत्ति

रतीश
Pune 
14-Jan-25

© Ratish

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January 12, 2025

Poem: In face of reality

To be abel to feel 
makes you vulnerable again
exposed to raw emotions
of the sufferings and the pain

It also provides a chance 
To reexperience slice of dance
relive moments of your dreams
to amplifiy smiles and screams

It shows you how to perceive
the right from the wrong
the weak from the strong
It defines what really is gold
In face of reality that unfolds

Ratish
Platform 4
Bilaspur
12-Jan-25


© Ratish

January 10, 2025

Poem नूर के भी नूर

तुम्हें सहजता से कह दिया
जो कभी किसी से नहीं कहा
या पर्दा रखा नहीं
या पर्दा रहा नहीं

जो हो गया वो हो गया
कुछ सोच के किया नहीं
इस बात की खुशी नहीं
या कोई गिला नहीं

तू, मैं और लोग सब
इस नूर के भी नूर है
क्यों काल के ग्रास में अब
जीने को मजबूर हैं
 
रतीश
10 Jan 25
बिलासपुर 
© Ratish

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January 09, 2025

Poem निष्ठुर

सर्वस्व पल में देनेवाले
कतरा कतरा देता है क्यूंँ
या मेरा सामर्थ्य कम है
या बड़ा ही निष्ठुर है तू

मैं तुच्छ, अधम ही सही
महाकरुण तेरा स्वभाव है
छोड़ निराधार मुझको
कैसे तू निर्विकार है

करके, ना करके देख लिया
तैर के, बह के देख लिया
नए कर्मफल लगते नहीं सूखे अरण्यों में
सर्वस्व मेरा समर्पित तेरे निष्ठुर चरणों में

रतीश
9 Jan 25
बिलासपुर 

© Ratish


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January 08, 2025

Couplets अहसान कितने

गिन रहा था - हैं तेरे अहसान कितने 
चुन रह था समुद्रांत से पाषाण कितने
बेगैरत होकर जी ली है कितनी सांसें
न जाने रह गए हैं मेरे अरमान कितने

रतीश
8 Jan 25
बिलासपुर 

© Ratish

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January 07, 2025

Couplets दीदार

तेरा दीदार जबसे हो गया है
तेरा दीदार होता जा रहा है
इश्क़ जुनून सा हो गया है
जीव ब्रह्मांड सा हो रहा है

रतीश
7 Jan 25
बिलासपुर

© Ratish

January 06, 2025

Couplets तेरी चाह में

मैं कारवां के कोलाहल में
पूर्णतः गुम था
क्यों खुशबू तेरी कृपा की
मेरी राह से गुजरी

गुजर जाती ये ज़िंदगी
तेरे बिना भी लेकिन
हाय! क्या गुजरी है ये
जो तेरी चाह में गुजरी

रतीश
6 Jan 25
बिलासपुर 
© Ratish

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Couplets

इस वक्त‌ और हालात ने 
ये कैसा दिन दिखाया है 
खुद को भूले जाता हूंँ 
जितना होश आया है

रतीश
6 Jan 25
बिलासपुर

© Ratish


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January 05, 2025

Couplets संजीदा

पहले जो कहते थे बहुत कुछ
अब थोड़े खामोश हो गए हैं
लबों से उनके कैसा शिकवा  
जब वो ही संजीदा हो गए हैं

रतीश
5 Jan 25
बिलासपुर





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© Ratish

January 04, 2025

Couplets

मुद्दतों बाद आज फिर आंँखें नम हैं
शायद कोई ख़याल घर आया होगा
दिल की सूखी पड़ी मिट्टी को
यादों के अब्र ने भिगोया होगा

अब्र=clouds

रतीश
4 Jan 25
बिलासपुर 

© Ratish

January 03, 2025

Hindi Poem जाने कौन है जो मेरे भीतर

यूँ तो कुछ भी नहीं है बदला
लेकिन सब कुछ बदल रहा है
जाने कौन है जो मेरे भीतर 
मेरे ही नाम से रह रहा है

मैं जी रहा हूंँ अपना जीवन
सही ग़लत वो चुन रहा है
जाने कौन है जो मेरे भीतर ...

मैं‌ था कभी कुछ और ही तब
ये कौन मेरे नाम से चल रहा है
यूँ तो कुछ भी नहीं है बदला
लेकिन सब कुछ बदल रहा है

3 Jan 25
रतीश
बिलासपुर

© Ratish

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