August 31, 2025

Hindi Poem संसारं महानाटकमिदं



संसारं महानाटकमिदं!

#हिन्दीकविता #काव्य #कविता #हिंदी #poetry #Poem #hindi #hindipoetry #shayari  #शायरी #words

© Ratish

August 30, 2025

Hindi Poem पशुपति



शिवार्पणं 

#हिन्दीकविता #काव्य #कविता #हिंदी #poetry #Poem #hindi #hindipoetry #shayari  #शायरी
© Ratish

August 27, 2025

Hindi Poem कोई सीधा हिसाब भी नहीं



© Ratish

27 August 
Bilaspur 

#हिन्दीकविता #काव्य #कविता #हिंदी #poetry #Poem #hindi #hindipoetry #shayari  #शायरी

August 11, 2025

मेरा जुनून


एक तू है
एक तेरा फितूर
साथ है
कभी पास, कभी दूर
एक मैं हूंँ
एक मेरा जुनून
घुलता रगों में जैसे
धड़कन से खून 

© Ratish
#हिन्दीकविता #काव्य #कविता #हिंदी #poetry #Poem #hindi #hindipoetry #shayari  #शायरी

August 07, 2025

कौन है असल कौन असर


दीवानों सा ही अक्सर
देखते हैं जब देखते हैं

दुआ हो या कोई कहर
सोचते हैं तब सोचते है

मय हो या तुम हो ज़हर
जाम तेरा सिर आँखों पर

कौन है अस्ल कौन असर
कौन करे किसे मुकम्मल

#हिन्दीकविता #काव्य #कविता #हिंदी #poetry #Poem #hindi #hindipoetry #shayari  #शायरी

© Ratish

August 03, 2025

Hindi Poem भक्त याचक लगता है


#हिन्दीकविता #काव्य #कविता #हिंदी #poetry #Poem #hindi #hindipoetry

© Ratish
3 Aug 25
Bilaspur 

July 06, 2025

Sanskrit Readings भवभूति - तत्तस्य किमपि द्रव्यं यो हि यस्य प्रियो जनः

न किञ्चिदपि कुर्वाणः
सौख्यैर्दुःखान्यपोहति।
तत्तस्य किमपि द्रव्यं 
यो हि यस्य प्रियो जनः॥
                                             भवभूति


बिना कुछ भी किये सुख से (भरता, अनुभूति कराता  है) और दुःखों को दूर करता है - जो जिसका प्रिय है वह उसका निश्चय ही अनमोल धन है।
सौख्यै: = सुख से (तृतीया बहुवचन) 
दुःखानि = दुःख को (द्वितीयाबहुवचन) 
अपोहित = दूर करता है 
दुःखानि+अपोहित = दुःखान्यपोहति (यण सन्धि)
Without doing anything they cause pleasure and remove afflictions. Therefore those you love are surely your treasures.

#सूक्ति #संस्कृत #aphorisims #Bhavabhuti #Sanskrit

May 25, 2025

सहज मैं हो गया


जीवन के मधु और कटु
पलों को अधरों से लगा
पी चुका था
गरलामृत का घड़ा

स्वेद रक्त धूल से
कलुषित तन में
हो गया था क्लिष्ट
अंतःकरण मेरा

शीतानिल मेघ-वृष्टि से
जैसे धुलती है धरा
तुम से मिल
सहज मैं हो गया 

25 May

© Ratish

May 24, 2025

सिखा दिया तुमने


मुझे फिर से सिखा दिया तुमने 
कोई आईना दिखा दिया तुमने
उलझ गया था लफ्ज़ों में कहीं 
ख़ामोशी से मिला दिया तुमने 

कहना आता था करना आता था 
चलना आता था बहना आता था
होना और रहना सिखा दिया तुमने 
मुझको मुझसे ही मिला दिया तुमने

24 May
© Ratish

May 21, 2025

अब तुम मेरे भीतर हो और बाहर भी

अब तुम मेरे भीतर हो और बाहर भी
ठीक किसी प्रिय स्मरणीय गीत की तरह
बजता है तो बाहर से सुनाई देता है
पढ़ लूं, तो भीतर से सुर-संगीत उभरते हैं

अब तुम मेरे भीतर हो और बाहर भी
ठीक किसी स्वजन मित्र मनमीत की तरह
बाहर हो जब मिलते हो या संवाद होता है
वर्ना भीतर तेरी यादों की जुगाली करता हूंँ

रतीश
21 May

© Ratish
#हिंदीpoetry #हिन्दी #poem #kavita #कविता #poetry #काव्य #शायरी #शेर #shayari #sher

May 19, 2025

Hindi Poem: रहेगा वो

जब यादें मद्धम होगीं 
तब जाने क्या रह जाएगा 
जब यादें मद्धम होगीं 
तब कौन पास आएगा
होगी एक दिन रौशनी 
नज़रों की भी मद्धम
रंगों, चेहरों और जगहों 
को फिर कौन देख पाएगा 
एक दिन ये आवाज़े 
भी होंगी मद्धम 
कौन कहेगा कौन सुनेगा 
कौन समझ पाएगा 
ज्ञानेन्द्रियाँ, कर्मेंद्रियांँ 
भी सब होंगे मद्धम
अंतःकरण का प्रभाव 
भी क्षिण हो जाएगा 
रहेगा वो जो था, है और रहेगा सदा
बाकी सब क्रमशः जीर्ण होता जाएगा 

19 May
रतीश

अंतःकरण = मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार

© Ratish

#हिंदीpoetry #हिन्दी #poem #kavita #कविता #poetry #काव्य #शायरी #शेर #shayari #sher

May 03, 2025

Hindi Poem कितना तन्हा हूंँ

जाने क्यों होती है सहर हर रात के बाद 
जाने क्या रह जाता है हर बात के बाद
तुझसे मिलकर मैं खुद से मिलता हूंँ
जाने क्या होता है मुलाकात के बाद 
अब तो अपना मिलना भी नहीं होता
कितना तन्हा हूंँ ऐसे हालात के बाद 

रतीश
3 May

© Ratish

#हिंदीpoetry #हिन्दी #poem #kavita #कविता #poetry #काव्य #शायरी #शेर #shayari #sher

May 01, 2025

इस ओर से उस ओर

वक्त की डोर ले चली है
इस ओर से उस ओर
हम भी क्या से क्या हो गए
इस ओर से उस ओर

जाने कब कैसे ऐसे हो गए
रिश्तों से महंगे पैसे हो गए
जाने कब चुन ली हमने खुशी 
की जगह संघर्ष और शोर

तुम भी मुझे थाम तो सकते थे
दो घड़ी आराम के हो सकते थे
है तुम्हारा भी मेरे जैसा ही हाल
अपने अपने चक्रव्यूह का जंजाल

सोचो या कुछ भी नहीं सोचो
करो या कुछ भी नहीं करो
सबसे बिसरेगा ही यह ठौर
जाना है इक छोर से दूजे छोर

फिर भी क्या सोचे जाते हैं
फिर भी क्या करे जाते हैं
जिंदगी को कौड़ियों में लुटाते
गुजरते इस ओर से उस ओर

रतीश
1 May


© Ratish

#हिंदीpoetry #हिन्दी #poem #kavita #कविता #poetry #काव्य #शायरी #शेर #shayari #sher

April 30, 2025

हर रोज़ बदलता हूंँ

कुछ रोज़ पुराने अखबारों सा
रद्दी में पड़ा रहता हूंँ
कभी आनेवाले पल के लिए
कतारों में खड़ा रहता हूंँ

हर रोज़ बदलता हूंँ लेकिन
खुद को वहीं कहता हूंँ
अपनी यादों, इरादों के संग
पुराने घर में ही रहता हूंँ

रतीश
30-Apr

© Ratish
#हिंदीpoetry #हिन्दी #poem #kavita #कविता #poetry #काव्य #शायरी #शेर #shayari #sher