दीवानों सा ही अक्सर
देखते हैं जब देखते हैं
दुआ हो या कोई कहर
सोचते हैं तब सोचते है
मय हो या तुम हो ज़हर
जाम तेरा सिर आँखों पर
कौन है अस्ल कौन असर
कौन करे किसे मुकम्मल
देखते हैं जब देखते हैं
दुआ हो या कोई कहर
सोचते हैं तब सोचते है
मय हो या तुम हो ज़हर
जाम तेरा सिर आँखों पर
कौन है अस्ल कौन असर
कौन करे किसे मुकम्मल
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