जब यादें मद्धम होगीं
तब जाने क्या रह जाएगा
जब यादें मद्धम होगीं
तब कौन पास आएगा
होगी एक दिन रौशनी
नज़रों की भी मद्धम
रंगों, चेहरों और जगहों
को फिर कौन देख पाएगा
एक दिन ये आवाज़े
भी होंगी मद्धम
कौन कहेगा कौन सुनेगा
कौन समझ पाएगा
ज्ञानेन्द्रियाँ, कर्मेंद्रियांँ
भी सब होंगे मद्धम
अंतःकरण का प्रभाव
भी क्षिण हो जाएगा
रहेगा वो जो था, है और रहेगा सदा
बाकी सब क्रमशः जीर्ण होता जाएगा
19 May
रतीश
अंतःकरण = मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार
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