कुछ रोज़ पुराने अखबारों सा
रद्दी में पड़ा रहता हूंँ
कभी आनेवाले पल के लिए
कतारों में खड़ा रहता हूंँ
हर रोज़ बदलता हूंँ लेकिन
खुद को वहीं कहता हूंँ
अपनी यादों, इरादों के संग
पुराने घर में ही रहता हूंँ
रतीश
30-Apr
रद्दी में पड़ा रहता हूंँ
कभी आनेवाले पल के लिए
कतारों में खड़ा रहता हूंँ
हर रोज़ बदलता हूंँ लेकिन
खुद को वहीं कहता हूंँ
अपनी यादों, इरादों के संग
पुराने घर में ही रहता हूंँ
रतीश
30-Apr
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