April 30, 2025

हर रोज़ बदलता हूंँ

कुछ रोज़ पुराने अखबारों सा
रद्दी में पड़ा रहता हूंँ
कभी आनेवाले पल के लिए
कतारों में खड़ा रहता हूंँ

हर रोज़ बदलता हूंँ लेकिन
खुद को वहीं कहता हूंँ
अपनी यादों, इरादों के संग
पुराने घर में ही रहता हूंँ

रतीश
30-Apr

© Ratish
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