May 25, 2025

सहज मैं हो गया


जीवन के मधु और कटु
पलों को अधरों से लगा
पी चुका था
गरलामृत का घड़ा

स्वेद रक्त धूल से
कलुषित तन में
हो गया था क्लिष्ट
अंतःकरण मेरा

शीतानिल मेघ-वृष्टि से
जैसे धुलती है धरा
तुम से मिल
सहज मैं हो गया 

25 May

© Ratish

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