January 10, 2025

Poem नूर के भी नूर

तुम्हें सहजता से कह दिया
जो कभी किसी से नहीं कहा
या पर्दा रखा नहीं
या पर्दा रहा नहीं

जो हो गया वो हो गया
कुछ सोच के किया नहीं
इस बात की खुशी नहीं
या कोई गिला नहीं

तू, मैं और लोग सब
इस नूर के भी नूर है
क्यों काल के ग्रास में अब
जीने को मजबूर हैं
 
रतीश
10 Jan 25
बिलासपुर 
© Ratish

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January 09, 2025

Poem निष्ठुर

सर्वस्व पल में देनेवाले
कतरा कतरा देता है क्यूंँ
या मेरा सामर्थ्य कम है
या बड़ा ही निष्ठुर है तू

मैं तुच्छ, अधम ही सही
महाकरुण तेरा स्वभाव है
छोड़ निराधार मुझको
कैसे तू निर्विकार है

करके, ना करके देख लिया
तैर के, बह के देख लिया
नए कर्मफल लगते नहीं सूखे अरण्यों में
सर्वस्व मेरा समर्पित तेरे निष्ठुर चरणों में

रतीश
9 Jan 25
बिलासपुर 

© Ratish


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January 08, 2025

Couplets अहसान कितने

गिन रहा था - हैं तेरे अहसान कितने 
चुन रह था समुद्रांत से पाषाण कितने
बेगैरत होकर जी ली है कितनी सांसें
न जाने रह गए हैं मेरे अरमान कितने

रतीश
8 Jan 25
बिलासपुर 

© Ratish

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January 07, 2025

Couplets दीदार

तेरा दीदार जबसे हो गया है
तेरा दीदार होता जा रहा है
इश्क़ जुनून सा हो गया है
जीव ब्रह्मांड सा हो रहा है

रतीश
7 Jan 25
बिलासपुर

© Ratish

January 06, 2025

Couplets तेरी चाह में

मैं कारवां के कोलाहल में
पूर्णतः गुम था
क्यों खुशबू तेरी कृपा की
मेरी राह से गुजरी

गुजर जाती ये ज़िंदगी
तेरे बिना भी लेकिन
हाय! क्या गुजरी है ये
जो तेरी चाह में गुजरी

रतीश
6 Jan 25
बिलासपुर 
© Ratish

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Couplets

इस वक्त‌ और हालात ने 
ये कैसा दिन दिखाया है 
खुद को भूले जाता हूंँ 
जितना होश आया है

रतीश
6 Jan 25
बिलासपुर

© Ratish


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January 05, 2025

Couplets संजीदा

पहले जो कहते थे बहुत कुछ
अब थोड़े खामोश हो गए हैं
लबों से उनके कैसा शिकवा  
जब वो ही संजीदा हो गए हैं

रतीश
5 Jan 25
बिलासपुर





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© Ratish

January 04, 2025

Couplets

मुद्दतों बाद आज फिर आंँखें नम हैं
शायद कोई ख़याल घर आया होगा
दिल की सूखी पड़ी मिट्टी को
यादों के अब्र ने भिगोया होगा

अब्र=clouds

रतीश
4 Jan 25
बिलासपुर 

© Ratish

January 03, 2025

Hindi Poem जाने कौन है जो मेरे भीतर

यूँ तो कुछ भी नहीं है बदला
लेकिन सब कुछ बदल रहा है
जाने कौन है जो मेरे भीतर 
मेरे ही नाम से रह रहा है

मैं जी रहा हूंँ अपना जीवन
सही ग़लत वो चुन रहा है
जाने कौन है जो मेरे भीतर ...

मैं‌ था कभी कुछ और ही तब
ये कौन मेरे नाम से चल रहा है
यूँ तो कुछ भी नहीं है बदला
लेकिन सब कुछ बदल रहा है

3 Jan 25
रतीश
बिलासपुर

© Ratish

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December 13, 2024

रसो वै सः

रसो वै सः

ये भी क्या विकल्प है माधुर्य या माधुरी
भोग-मोक्ष से जीवन में मिलेगा एक ही 
क्यों रहे पूर्ण कर्म-भाव में एक राह
इच्छा-ज्ञान-क्रिया है जब है एक ही

ध्येय नहीं मात्र द्रव्य और अर्थ ही
जीवन में रस का संचार है जरूरी
द्वैत में रह कर कब से भटक रहे
जीवन ही है माधुर्य और माधुरी

रतीश
13 Dec 24
Bilaspur

© Ratish

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November 03, 2024

Readings एककोऽहं कोपरोऽस्ति मे

एककोऽहं कोपरोस्ति मे

एककः अहं कः परः अस्ति मे

अभिनवगुप्त

एक मै ही हूँ मुझ से अलग और कौन है

I am only one who else is there other than me.

Abhinavgupta


July 20, 2024

यत्र यत्र मनः गच्छेत् तत्र तत्र समाविशेत्

This has been my status message for a while
यत्र यत्र मनः गच्छेत् तत्र तत्र समाविशेत्
Where ever mind wanders (your interests / attention takes you) be fully engrossed there.

Probably used as recentring sutra. I don't recall where I came across  them. It's "BE" centric not "DO" centric.

Essentially - be in the 
present, enjoy every thing. Nothing is more important that the other.

Work, distractions, leisure, responsibilities and commitments are different strings of life's musical instrument. When played together at times it results in music, at times in cacophony and sometimes in silence.

यत्र यत्र मनः गच्छेत् तत्र तत्र समाविशेत्

© Ratish

June 30, 2024

अजेय Invincible


पालने से समरभूमि तक चुनौती है

परिस्थिति, विपक्ष, दाक्ष्य कसौटी है
योद्धा वो नहीं जो युद्ध में लड़ा नहीं
योद्धा कभी किसी युद्ध से बड़ा नहीं

रथी, अतिरथी, महारथी सभी रण में है
हो विजय! संकल्प से अडिग प्रण में है
कौन योजना, व्यूह, छद्म का निर्माण करे
कौन युद्ध में शत्रुपक्ष को भयाक्रान्त करे

ध्यान रहे! ये समर अनवरत चलता है
ये दावानल है कालाग्नि सम जलता है
हो अजेय तो भी ध्येय से न भटकना
नये शस्त्रों व्यूहों योद्धाओं को गढ़ना

आज के समरवीर कल नहीं रण में होंगे
किंतु शत्रुपक्ष अपने अडिग प्रण में होंगे
ध्यान रहे! ये समर अनवरत चलता है
ये दावानल है कालाग्नि सम जलता है

© Ratish
बिलासपुर 
30 June 2024

#T20WorldCupFinal
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March 09, 2024

धुरी पर घूमता रहता हूँ

चलता हूंँ पहुंच पाता नहीं हूँ
किस शक्ति से संचालित मै
स्थिति गति अपनी ढूंढता रहता हूँ
पंखे सा धुरी पर घूमता रहता हूँ

Ratish
9th March
Pune

© Ratish
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March 03, 2024

धीमे तीर सा

कुछ करते हैं कुछ हो जाता है
मिलता है कुछ कुछ खो जाता है

वक्त गुजरता हुआ धीमे तीर सा
जिंदगी के आर पार हो जाता है

रतीश
पूना
3rd March 24

© Ratish
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