रसो वै सः
ये भी क्या विकल्प है माधुर्य या माधुरी
भोग-मोक्ष से जीवन में मिलेगा एक ही
क्यों रहे पूर्ण कर्म-भाव में एक राह
इच्छा-ज्ञान-क्रिया है जब है एक ही
ध्येय नहीं मात्र द्रव्य और अर्थ ही
जीवन में रस का संचार है जरूरी
द्वैत में रह कर कब से भटक रहे
जीवन ही है माधुर्य और माधुरी
रतीश
13 Dec 24
Bilaspur
#Poetry #Poem #कविता #काव्य #kavita #kavya #Hindi #हिन्दी #हिंदी
No comments:
Post a Comment