तुझे क्या बताऊँ ए दिलरुबा
क्या इश्क़ है क्या है वफ़ा
जिसने चाहा उसे रुस्वा किया
जिसे चाहा उसे अपना लिया
तुझे क्या बताऊँ ए जानेजाँ
क्या मौज है क्या है सजा
जब दोनों तेरा है दिया हुआ
कोई एक चुनके क्या फ़ायदा
तुझे क्या बताऊँ ए हमनशीं
ग़म है क्या क्या है ख़ुशी
ये दो ऑंखें तेरी मुझे देखती
एक तू नज़र आती नहीं
तुझे क्या बताऊं ए हमनफ़स
हमदर्द तू न गर हमसफ़र
ना हो तू मेरा हांसिल यहाँ
रहने दे बस मुझे आश्ना
रतीश
© Ratishबिलासपुर
14th May 22
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