April 16, 2022

#SpandaKarika #स्पन्दकारिका When mental disturbance ceases यदा क्षोभः प्रलीयते

यदा क्षोभः प्रलीयते तदा स्यात् परमं पदम् 

स्पन्दकारिका 1 9

When the mental disturbance (agitation) ceases (is dissolved) then highest state is attained.

#Vasugupta #वसुगुप्त #SpandaKarika #स्पन्दकारिका #कश्मीर #शैव #दर्शन #अद्वैत #Kashmir #Shaivism #philosophy #Nondualism #Advaita

April 14, 2022

#Tantra #तंत्र Wherever your mind goes settle down there यत्र यत्र मनः गच्छेत् तत्र तत्र समाविशेत्

यत्र यत्र मनः गच्छेत् तत्र तत्र समाविशेत् 

Wherever your mind goes settle down there (totally absorbed/permeate/pervade)

#Tantra #तंत्र  #संस्कृत #Sanskrit

February 20, 2022

शिवस्तोत्रावली उत्पल देव Shivastrotavali Utpaldeva shloka 1

न ध्यायतो न जपतः स्याद्यस्याविधिपूर्वकम् ।
एवमेव शिवाभासस्तं नुमो भक्तिशालिनम् ॥१॥


स्याद्यस्याविधिपूर्वकम् = स्याद् +यस्य +अविधिपूर्वकम्
शिवाभासस्तं = शिव + आभास: तं


जिसको बिना ध्यान, जप इत्यादि के ऐसे ही बिना किसी विधि के (अनुग्रह /अनुपाय द्वारा) शिव स्वरुप का साक्षात्कार (आभास = प्रकाश ) प्राप्त (स्फ़ुरण ) हो रहा है उस भक्तिवान को नमन है (से मै एकात्म्य हो रहा हूँ)।


One who achieves (stays in) highest state of consciousness (Unity with Shiva state) without any meditation, without efforts to maintain (remain in) this state or without any external means (or progression / spontaneous) my salutations to him (I am becoming that)


#शिवस्तोत्रावली #उत्पलदेव #कश्मीर #शैव #दर्शन #अद्वैत
#Shivastrotavali #Utpaldeva #Kashmir #Shaivism #philosophy #Nondualism #Advaita


January 23, 2022

Readings: Maha Kavi Kalidas - KumaraSambhavam महाकवि कालिदास विरचित कुमारसंभवम्

 KumaraSambhavam Canto 2 verses 9 and 10 - English Translation below
महाकवि कालिदास विरचित कुमारसंभवम् सर्ग 2 श्लोक 9 -10 


महाकवि कालिदास विरचित कुमारसम्भवम्
महाकवि कालिदास विरचित कुमारसम्भवम्


2.9
O lord the world (जगत: = One that moves/changes external physical manifestations and internal perceived states) originates (योनिः) from you, you yourself do not have any origin (अयोनिः = अविद्यमानः योनिः यस्य सः) .The world ends (जगतः अन्तः)  but nothing brings you to an end (निरन्तकः = निर्गतः अन्तः यस्मात् सः). You exist before creation (जगतम् आदिः) but there is nothing that precedes you (अनादि = अविद्यमान आदिर्यस्य सः). You are the lord of this world (जगताम्  ईशः) and you yourself have no lords (निरिश्वरः = निर्गतः ईश्वरः यस्मात्  सः)  

2.10
You know (वेत्सि ) yourself by yourself. You create (सृजसि) yourself (to know one's capability) by yourself.  And on attaining the purpose you dissolve your own form into yourself (प्रलियसे). 



If you are interested more you can listen to lecture series in English






#MahaKavi #Kalidas - #KumaraSambhavam #महाकवि #कालिदास विरचित #कुमारसंभवम्

January 22, 2022

मुरझते फूल




मुरझते फूल फूल ही तो हैं
पंखुड़ियों के रंग मद्धम हैं
रहते अभी भी उन्हीं शाखों में
जहां हरे पात जडे़ नम हैं

उसके प्राण जीवनक्रम है
रश्मि धरा व्योम सहचर हैं
बीज से उसके बनेंगे पौधे
मुरझते फूल ही जीवन है

रतीश
22 Jan
बिलासपुर
© Ratish







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December 25, 2021

Hindi Poem हिन्दी कविता: पुल

फिर मैं पुल पे चल रहा था
कभी रेत कभी पानी पे छाया
पंछी बसे पानी और नभ में
मिलती ही है यथार्थ से माया

जब पक्षी सतह पे उड़ते
बिम्ब प्रतिबिम्ब हमें दिखता
ऊंची अगर ये उड़ान हो तो
जाएगा कहां बनके ये साया
                                  रतीश
                                  25 Dec 21


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October 24, 2021

हर घड़ी बेसुध क्यों न रहें Hindi Poem

तेरा साया क्यों है मेरे ऊपर
उठ गया तो भी कहां जाएगा
संग हैं तेरे तो समा है यहां
इसके जाने का वक्त आएगा

हर घड़ी बेसुध क्यों न रहें
कल न महफ़िल न साकी हो
वक्त तो आता जाता रहता है
सांसें किसमें कितनी बाकी हो



रतीश
बिलासपुर
24 October 21

© Ratish


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September 12, 2021

Hindi Poem: स्वच्छंद

प्रतिभा को कर प्रखर
पुरुषार्थ का संचार कर
विवेक, श्रम  से सतत्
अवरोध का संहार कर

आरुढ़ हो स्वानंद में
आनंद का संचार कर
इच्छा ज्ञान क्रिया में रहकर
स्वच्छंद सा व्यवहार कर

 


© Ratish

12th September 2021

Bilaspur 

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Hindi Poem: फिर से

मुझसे मिलने वो आ गया फिर से
मुझको मुझसे मिला गया फिर से
मुझमें जो कुछ भी मेरा अपना था
सारा का सारा भुला गया फिर से
 

 

 © Ratish

 

11th September 2021

Bilaspur 

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September 05, 2021

Hindi Poem और है क्या

सुन रहा हू़ॅं जिसे हर क्षण
गूंज तेरी है और है क्या
देखते हैं नयन जिसे हर कण
तू ही है और है क्या

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© Ratish
बिलासपुर
5 September 21

June 27, 2021

नर्म बूंदें

नर्म बूंदें

 
हम जब तपते हैं झुलस जाते है
दूर बादल बनते हैं खिचें आते है
हैं नर्म बूंदें बारिश की बडी़
पिछले मौसम भूल जाते है

मेरी सोहबत का है ये असर
आँखों का पानी हो जाए शरर* (*चिंगारी)
तेरी इनायत का राज़ तू जाने
नर्म बूंदें जो बरसे मुझ पर
 
27 जून
रतीश
बिलासपुर

 

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© Ratish

June 16, 2021

जाहिर है तेरी हस्ती

खुलने लगी हैं दीवारों की परतें कहीं कहीं
दिखने लगी हैं पुरानी रंगों-रंगत कहीं कहीं
 
जाने कितने लिबास तूने पहन रक्खे हैं
जाहिर है तेरी हस्ती फिर भी कहीं कहीं
 
१६ जून
रतीश
बिलासपुर

 




 

© Ratish

16th June 

Bilaspur 

#कविता #काव्य #शायरी #Poetry #Poem #Shayari

June 13, 2021

तूने मुझको अपना दीवाना बनाया ही नहीं

तूने मुझको अपना दीवाना बनाया ही नहीं 

कब क्या हो गया ये मेरी समझ आया ही नहीं 

मेरी आँखों में तुझे  ताउम्र को बस जाना था 

लेकिन भूले से कभी ख्वाबों में आया भी नहीं 

तू मेरे संग था, है और रहेगा सदा 

न छुपाया कभी तो तूने जताया भी नहीं

रतीश 

१३ जून

बिलासपुर 

 


 

 

 

© Ratish

13th June 

Bilaspur 

#कविता #काव्य #Poetry #Shayari #शायरी #Poem

Kavita, Couplets: पत्ता हूँ I am a leaf

पत्ता हूँ , हवाओं से हिल रहा हूँ मैं 

तुझसे जुड़े बिना खुद सा नहीं हूँ मैं

 

I am a leaf

Can still sway in the wind

Without your association

I cease to be self

 


© Ratish

13th June

Bilaspur

 

#Kavita,  #Shayri #Poetry #Poem

June 12, 2021

Hindi Kavita विस्तार में यह समुद्र है


 

पत्तों पर ठहरी बूंदों से हम हैं
अनित्य, नश्वर यह जीवन है
 
स्वच्छंदता  का सतत भ्रम है
मृगमरीचिका है,  दिवास्वप्न है
 
बूदें परिधि में क्षूद्र हैं
विस्तार में यह समुद्र है
 

 © Ratish

12 जून 

बिलासपुर

 

#कविता #kavita #Poem #Poetry