मुरझते फूल फूल ही तो हैं
पंखुड़ियों के रंग मद्धम हैं
रहते अभी भी उन्हीं शाखों में
जहां हरे पात जडे़ नम हैं
जहां हरे पात जडे़ नम हैं
उसके प्राण जीवनक्रम है
रश्मि धरा व्योम सहचर हैं
बीज से उसके बनेंगे पौधे
मुरझते फूल ही जीवन है
रतीश
22 Jan
बिलासपुर
© Ratish
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