June 16, 2021

जाहिर है तेरी हस्ती

खुलने लगी हैं दीवारों की परतें कहीं कहीं
दिखने लगी हैं पुरानी रंगों-रंगत कहीं कहीं
 
जाने कितने लिबास तूने पहन रक्खे हैं
जाहिर है तेरी हस्ती फिर भी कहीं कहीं
 
१६ जून
रतीश
बिलासपुर

 




 

© Ratish

16th June 

Bilaspur 

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