June 27, 2021

नर्म बूंदें

नर्म बूंदें

 
हम जब तपते हैं झुलस जाते है
दूर बादल बनते हैं खिचें आते है
हैं नर्म बूंदें बारिश की बडी़
पिछले मौसम भूल जाते है

मेरी सोहबत का है ये असर
आँखों का पानी हो जाए शरर* (*चिंगारी)
तेरी इनायत का राज़ तू जाने
नर्म बूंदें जो बरसे मुझ पर
 
27 जून
रतीश
बिलासपुर

 

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© Ratish

June 16, 2021

जाहिर है तेरी हस्ती

खुलने लगी हैं दीवारों की परतें कहीं कहीं
दिखने लगी हैं पुरानी रंगों-रंगत कहीं कहीं
 
जाने कितने लिबास तूने पहन रक्खे हैं
जाहिर है तेरी हस्ती फिर भी कहीं कहीं
 
१६ जून
रतीश
बिलासपुर

 




 

© Ratish

16th June 

Bilaspur 

#कविता #काव्य #शायरी #Poetry #Poem #Shayari

June 13, 2021

तूने मुझको अपना दीवाना बनाया ही नहीं

तूने मुझको अपना दीवाना बनाया ही नहीं 

कब क्या हो गया ये मेरी समझ आया ही नहीं 

मेरी आँखों में तुझे  ताउम्र को बस जाना था 

लेकिन भूले से कभी ख्वाबों में आया भी नहीं 

तू मेरे संग था, है और रहेगा सदा 

न छुपाया कभी तो तूने जताया भी नहीं

रतीश 

१३ जून

बिलासपुर 

 


 

 

 

© Ratish

13th June 

Bilaspur 

#कविता #काव्य #Poetry #Shayari #शायरी #Poem

Kavita, Couplets: पत्ता हूँ I am a leaf

पत्ता हूँ , हवाओं से हिल रहा हूँ मैं 

तुझसे जुड़े बिना खुद सा नहीं हूँ मैं

 

I am a leaf

Can still sway in the wind

Without your association

I cease to be self

 


© Ratish

13th June

Bilaspur

 

#Kavita,  #Shayri #Poetry #Poem

June 12, 2021

Hindi Kavita विस्तार में यह समुद्र है


 

पत्तों पर ठहरी बूंदों से हम हैं
अनित्य, नश्वर यह जीवन है
 
स्वच्छंदता  का सतत भ्रम है
मृगमरीचिका है,  दिवास्वप्न है
 
बूदें परिधि में क्षूद्र हैं
विस्तार में यह समुद्र है
 

 © Ratish

12 जून 

बिलासपुर

 

#कविता #kavita #Poem #Poetry