September 10, 2022

Readings: किरातार्जुनीयम् श्लोक 1.5 भारवि

स किंसखा साधु न शास्ति योऽधिपं हितान्न यः संशृणुते स किंप्रभुः। 
श्लोक 1.5 
#किरातार्जुनीयम्  #भारवि

जो मित्र (अथवा मन्त्री) राजा को उचित बातों की सलाह नहीं देता वह कैसा मित्र (अथवा मन्त्री) है? जो राजा अपने हितैषी मित्र (अथवा मन्त्री) की हितकारी बात नहीं सुनता वह कैसा राजा है? 

© Ratish

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