April 19, 2020
April 18, 2020
Couplets फिर नया सा प्यार दो
जो कभी किसी से कहा नहीं
उसे कागजों पर उभार दो
ये जख्म है बड़े कीमती
इन्हे फिर नया सा प्यार दो
© Ratish
Pune
18 April 2020
Couplets बस तू ही दिखाई दे है
एक दौर वो भी था
जब खोजते थे तेरे निशान
एक लम्हा ये भी है
बस तू ही दिखाई दे है
© Ratish
Pune
18 April 2020
जब खोजते थे तेरे निशान
एक लम्हा ये भी है
बस तू ही दिखाई दे है
© Ratish
Pune
18 April 2020
April 16, 2020
Hindi Poem Indrajeet इन्द्रजीत
I had started writing on Indrajeet as one of the pre-eminent warrior who
was both highly skilled and had an advantage of being a mayavi which he
used to vanquish enemies in any warfare.
In the current context we are only left with people who spread misinformation and are full of deceit. And they use what ever means possible towards their end.
इन्द्रजीत
अस्त्र शास्त्र थे सुसज्जित यज्ञशाल में
लपटें लील लेती थी आहुतियाँ भी थाल से
अपराजेय इंद्रजीत अर्चि सा धधक रहा
जो क्रुद्ध हो बरसने शत्रुदल तृण विशाल में
रक्षासश्रेष्ठ युवराज युद्धकौशल दक्ष था
विजय थी वहीं रावणि जिस पक्ष था
पितृव्य, भ्राता, परिजन काल के ग्रास थे
रावणसुत स्वयं काल सा काल के समक्ष था
दिव्यायुध अर्जित किये तपोबल ज्ञान से
माया के संचार में विश्वजीतअप्रतिम था
जय सर्वोपरि थी न कोई नियम मान्य था
सत्य से भी बड़ा राक्षसकुल का सम्मान था
पूर्णाहुति के पर्यंत वटवृक्ष पर दी बली
अभिमंत्रित किये रथ, शस्त्र और सारथी
रणकर्कश रावणि रथारूढ़ नभपथ उड़ा
हर्षित राक्षस सेना सिंहनाद करते चली
व्योम से दारुण बाण वृष्टि थी निरंतर
मर्कट वीर हत क्षत गिरे समरभूमि पर
वानरयूथपति अदृश्य शत्रु वार से थे विकल
त्राहि माम महाविराव गूंजा हर ओर स्वर
वानरसेना विध्वंस करता मेघनाद बढ़ा द्रुतगति
भ्रम और संहार शक्ति से परिपूर्ण वह अतिरथी
राम-लक्ष्मण मूर्छित किये अभिमंत्रित प्रहार से
हर्षित देवशत्रुवाहिनी लंकावृत्ति - जयति रावणि!
रणश्रेष्ठ दशरथनन्दनों को अचेत देख कर
स्तब्ध-निराश्ररित था मर्केट भालूक शिविर
युद्ध में रघुकुल सूर्य शौर्य था ढक गया
मायावी इंद्रजीत था तमोमय सलीलधर
विस्मय ! अगणित क्षत विक्षत वीर शांत
विस्मय ! विजित पाषण तारक रमाकांत
विस्मय ! स्वयं शेष सौमित्र बंधे नागपाश
अहो ! कराल समर का हो रहा अनिष्टांत
Link to Part 2 of the Poem
© Ratish
Pune
16 April 2020
#Indrajeet #Meghnad #Ravani #Vishwajeet
#इन्द्रजीत #मेघनाद #रावणि #विश्वजीत
In the current context we are only left with people who spread misinformation and are full of deceit. And they use what ever means possible towards their end.
इन्द्रजीत
अस्त्र शास्त्र थे सुसज्जित यज्ञशाल में
लपटें लील लेती थी आहुतियाँ भी थाल से
अपराजेय इंद्रजीत अर्चि सा धधक रहा
जो क्रुद्ध हो बरसने शत्रुदल तृण विशाल में
रक्षासश्रेष्ठ युवराज युद्धकौशल दक्ष था
विजय थी वहीं रावणि जिस पक्ष था
पितृव्य, भ्राता, परिजन काल के ग्रास थे
रावणसुत स्वयं काल सा काल के समक्ष था
दिव्यायुध अर्जित किये तपोबल ज्ञान से
माया के संचार में विश्वजीतअप्रतिम था
जय सर्वोपरि थी न कोई नियम मान्य था
सत्य से भी बड़ा राक्षसकुल का सम्मान था
पूर्णाहुति के पर्यंत वटवृक्ष पर दी बली
अभिमंत्रित किये रथ, शस्त्र और सारथी
रणकर्कश रावणि रथारूढ़ नभपथ उड़ा
हर्षित राक्षस सेना सिंहनाद करते चली
व्योम से दारुण बाण वृष्टि थी निरंतर
मर्कट वीर हत क्षत गिरे समरभूमि पर
वानरयूथपति अदृश्य शत्रु वार से थे विकल
त्राहि माम महाविराव गूंजा हर ओर स्वर
वानरसेना विध्वंस करता मेघनाद बढ़ा द्रुतगति
भ्रम और संहार शक्ति से परिपूर्ण वह अतिरथी
राम-लक्ष्मण मूर्छित किये अभिमंत्रित प्रहार से
हर्षित देवशत्रुवाहिनी लंकावृत्ति - जयति रावणि!
रणश्रेष्ठ दशरथनन्दनों को अचेत देख कर
स्तब्ध-निराश्ररित था मर्केट भालूक शिविर
युद्ध में रघुकुल सूर्य शौर्य था ढक गया
मायावी इंद्रजीत था तमोमय सलीलधर
विस्मय ! अगणित क्षत विक्षत वीर शांत
विस्मय ! विजित पाषण तारक रमाकांत
विस्मय ! स्वयं शेष सौमित्र बंधे नागपाश
अहो ! कराल समर का हो रहा अनिष्टांत
Link to Part 2 of the Poem
© Ratish
Pune
16 April 2020
#Indrajeet #Meghnad #Ravani #Vishwajeet
#इन्द्रजीत #मेघनाद #रावणि #विश्वजीत
Couplets: देख कर तुझको बचपन याद आता है
देख कर तुझको बचपन याद आता है
वो सादगी वो भोलापन याद आता है
याद आती है वो बेफिक्री वो बेपरवाही
और अपनों का अपनापन याद आता है
© Ratish
Pune
16 April 2020
वो सादगी वो भोलापन याद आता है
याद आती है वो बेफिक्री वो बेपरवाही
और अपनों का अपनापन याद आता है
© Ratish
Pune
16 April 2020
April 15, 2020
Couplets मेरे रक़ीब
मेरे रक़ीब चल साथ बैठ कर पीते हैं
तेरे दीदार से मुझको वो याद आता है
© Ratish
15 April 2020
Pune
April 14, 2020
Couplets मैं भी कभी मैं था
तुझको देखता हूँ तो खुदा याद आता है
मैं भी कभी मैं था ये याद आता है
© Ratish
14 April 2020
Pune
मैं भी कभी मैं था ये याद आता है
© Ratish
14 April 2020
Pune
Couplets देखा है तुझमें क्या-क्या
मेरी नज़रों ने बना दिया तुझकोअधिक हसीं
ये चाहत, ये कशिश, ये दीवानगी आसां तो नहीं
देखा है तुझमें क्या-क्या कैसे मैं क्या ये कहूँ
है मय, है जाम, है नशा है, तू है मेरी ज़िन्दगी
© Ratish
14 April 2020
Pune
ये चाहत, ये कशिश, ये दीवानगी आसां तो नहीं
देखा है तुझमें क्या-क्या कैसे मैं क्या ये कहूँ
है मय, है जाम, है नशा है, तू है मेरी ज़िन्दगी
© Ratish
14 April 2020
Pune
Couplets थोड़ा दरिया सा फिर बनाओ मुझे
लहरों अब आ कर डुबाओ मुझे
थोड़ा दरिया सा फिर बनाओ मुझे
सूखा पड़ा हूँ रेत सा साहिल पर
आगोश में लेकर हदें फिर भुलाओ मुझे
© Ratish
14 April 2020
Pune
थोड़ा दरिया सा फिर बनाओ मुझे
सूखा पड़ा हूँ रेत सा साहिल पर
आगोश में लेकर हदें फिर भुलाओ मुझे
© Ratish
14 April 2020
Pune
April 13, 2020
Couplets तेरा करम तेरा रहम
जो कभी दो जहां था चाहता
मांगे आज वह पोहा चाय
तेरा करम तेरा रहम
वो भी मिला ये भी पाए
© Ratish
13th April 2020
Pune
April 12, 2020
Reflections
Two score and three years ago I came into being. The scale of time extends to infinity in both directions. We all have a finite time here to live, contribute and prosper. The current situation only accentuates further the fragility of our lives.
Looking back on my journey one constant that I find is an aspiration to learn and understand. I can come to terms with a thought that I do not have the answers. What I find harder is to give up the quest to understand and live a more meaningful life.
This quest has taken me across oceans, changed the direction of my life innumerable times. Led me to commit some atrocious mistakes and errors of judgement. I have fallen flat on my face. I have also received help and support for which I was not worthy. I have been fortunate to be among friends no matter where I was,
In this moment of reflection I would like to share a few themes that have guided me
- Dream Big
- Make it real
- When you get there there is no there there
- Enjoy the moment and the process
- Leave things better than you found them
© Ratish
12 Apr 2020
Pune
Readings: Sanskrit Vyasa - Remain unaffected by the miseries of this world
All the low lying regions is perceived to be flat while observing from the peaks of mountain, in the same way for people who embody wisdom remain unaffected by the miseries of this world.
#Vyasa #Sanskrit #equanimity #wisdom
April 11, 2020
Hindi Poem - एक बारगी फिर सोच लो
एक बारगी फिर सोच लो
कभी ऑंखें मूँद कर बैठना
कहीं चाय पर वो गुफ़्तगू
लिख़ लेना जो अच्छा हो पढ़ा
हांथों से अपने हूबहू
ये आज कल जो मंडी है
बिकता है हीरा कोयले की तरह
ये मंज़र, ये लोग, ये लम्हे भूल कर
क्या ढूँढ़ते हैं हम दरबदर
एक बारगी फिर सोच लो
जिसकी तुम्हें दरकार है
तुम नूर हो इस जहान के
कहीं सीमित तो नहीं विचार हैं
© Ratish
11 April 2020
Pune
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