माना तेरे नूर से रौशन नहीं हम
अंधेरे भी तुमसे ही छाए हुए हैं
दुनिया में बहुत कुछ है लेकिन
ध्यान अंदर अपने लगाए हुए हैं
अंधेरे भी तुमसे ही छाए हुए हैं
दुनिया में बहुत कुछ है लेकिन
ध्यान अंदर अपने लगाए हुए हैं
बाजा़र में दाम लगा है सबका
झोला हम भी लटकाए हुए हैं
वक्त की चाल में देख अपनी हालत
हालात खयालात पे मुस्काए हुए हैं
रतीश
12 Apr
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