April 12, 2025

Hindi Poem मुस्काए हुए हैं

माना तेरे नूर से रौशन नहीं हम
अंधेरे भी तुमसे ही छाए हुए हैं
दुनिया में बहुत कुछ है लेकिन
ध्यान अंदर अपने लगाए हुए हैं

बाजा़र में दाम लगा है सबका
झोला हम भी लटकाए हुए हैं
वक्त की चाल में देख अपनी हालत
हालात खयालात पे मुस्काए हुए हैं
रतीश
12 Apr


© Ratish


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