April 30, 2025

हर रोज़ बदलता हूंँ

कुछ रोज़ पुराने अखबारों सा
रद्दी में पड़ा रहता हूंँ
कभी आनेवाले पल के लिए
कतारों में खड़ा रहता हूंँ

हर रोज़ बदलता हूंँ लेकिन
खुद को वहीं कहता हूंँ
अपनी यादों, इरादों के संग
पुराने घर में ही रहता हूंँ

रतीश
30-Apr

© Ratish
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April 16, 2025

कोई मलाल मत रखना

मेरे जैसा तुम अपना हाल मत रखना
दिल में अपने कोई मलाल मत रखना
रखना सब संजोए जो भी होकर गुजरा
जो नहीं हुआ उसका ख्याल मत रखना

रतीश
16 Apr


© Ratish



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April 12, 2025

Hindi Poem मुस्काए हुए हैं

माना तेरे नूर से रौशन नहीं हम
अंधेरे भी तुमसे ही छाए हुए हैं
दुनिया में बहुत कुछ है लेकिन
ध्यान अंदर अपने लगाए हुए हैं

बाजा़र में दाम लगा है सबका
झोला हम भी लटकाए हुए हैं
वक्त की चाल में देख अपनी हालत
हालात खयालात पे मुस्काए हुए हैं
रतीश
12 Apr


© Ratish


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April 05, 2025

When will we live

We are no longer young
We are not yet too old
We don't like to do
What we have been told
We have lost our innocent smile
Too much has passed in front of our eyes
Triumph, passion, power, purpose, love and grief
Are precious colored candies
we run after in misbelief
Time is constantly fleeting ahead and away
When will we live, rejoice, find our true way

Ratish
5 Apr
Bilaspur 
© Ratish

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April 02, 2025

तुम पूर्व स्वर्ण रश्मि

तुम पूर्व स्वर्ण रश्मि सम प्रखर
मैं मेघाच्छादित घनश्याम प्रिये
तुम चंदन का तरुण तरुवर
मैं उसपे लिपटा नाग प्रिये
तुम अलकनन्दा का शीतल जल
मैं प्रचण्ड दावानल की आग प्रिये
तुम जीवन का सुखमय पल
मै रुधिर की रिसती धार प्रिये
तुम आज मेरा, तुम बीता कल
तुम कल होने वाला प्यार प्रिये
बस डरता हूंँ कुछ कहने से
कहीं दो ना तुम दुत्कार प्रिये

रतीश
1 Apr
Bilaspur

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© Ratish