December 13, 2024

रसो वै सः

रसो वै सः

ये भी क्या विकल्प है माधुर्य या माधुरी
भोग-मोक्ष से जीवन में मिलेगा एक ही 
क्यों रहे पूर्ण कर्म-भाव में एक राह
इच्छा-ज्ञान-क्रिया है जब है एक ही

ध्येय नहीं मात्र द्रव्य और अर्थ ही
जीवन में रस का संचार है जरूरी
द्वैत में रह कर कब से भटक रहे
जीवन ही है माधुर्य और माधुरी

रतीश
13 Dec 24
Bilaspur

© Ratish

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November 03, 2024

Readings एककोऽहं कोपरोऽस्ति मे

एककोऽहं कोपरोस्ति मे

एककः अहं कः परः अस्ति मे

अभिनवगुप्त

एक मै ही हूँ मुझ से अलग और कौन है

I am only one who else is there other than me.

Abhinavgupta


July 20, 2024

यत्र यत्र मनः गच्छेत् तत्र तत्र समाविशेत्

This has been my status message for a while
यत्र यत्र मनः गच्छेत् तत्र तत्र समाविशेत्
Where ever mind wanders (your interests / attention takes you) be fully engrossed there.

Probably used as recentring sutra. I don't recall where I came across  them. It's "BE" centric not "DO" centric.

Essentially - be in the 
present, enjoy every thing. Nothing is more important that the other.

Work, distractions, leisure, responsibilities and commitments are different strings of life's musical instrument. When played together at times it results in music, at times in cacophony and sometimes in silence.

यत्र यत्र मनः गच्छेत् तत्र तत्र समाविशेत्

© Ratish

June 30, 2024

अजेय Invincible


पालने से समरभूमि तक चुनौती है

परिस्थिति, विपक्ष, दाक्ष्य कसौटी है
योद्धा वो नहीं जो युद्ध में लड़ा नहीं
योद्धा कभी किसी युद्ध से बड़ा नहीं

रथी, अतिरथी, महारथी सभी रण में है
हो विजय! संकल्प से अडिग प्रण में है
कौन योजना, व्यूह, छद्म का निर्माण करे
कौन युद्ध में शत्रुपक्ष को भयाक्रान्त करे

ध्यान रहे! ये समर अनवरत चलता है
ये दावानल है कालाग्नि सम जलता है
हो अजेय तो भी ध्येय से न भटकना
नये शस्त्रों व्यूहों योद्धाओं को गढ़ना

आज के समरवीर कल नहीं रण में होंगे
किंतु शत्रुपक्ष अपने अडिग प्रण में होंगे
ध्यान रहे! ये समर अनवरत चलता है
ये दावानल है कालाग्नि सम जलता है

© Ratish
बिलासपुर 
30 June 2024

#T20WorldCupFinal
#teamindia
#bleedblue

March 09, 2024

धुरी पर घूमता रहता हूँ

चलता हूंँ पहुंच पाता नहीं हूँ
किस शक्ति से संचालित मै
स्थिति गति अपनी ढूंढता रहता हूँ
पंखे सा धुरी पर घूमता रहता हूँ

Ratish
9th March
Pune

© Ratish
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March 03, 2024

धीमे तीर सा

कुछ करते हैं कुछ हो जाता है
मिलता है कुछ कुछ खो जाता है

वक्त गुजरता हुआ धीमे तीर सा
जिंदगी के आर पार हो जाता है

रतीश
पूना
3rd March 24

© Ratish
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