November 21, 2015

परिप्रेक्ष्य - Context Hindi Poem

परिप्रेक्ष्य

ऋतुवों का परिर्वतन ऊषा-निशा क्रम
बह्माण्ड राग भैरव लय-प्रलय नियम
जीवन का विस्तार चक्र से परिमित
इस मंच से स्वांग हुए है अनवरत

कुछ पात्र छोड गए नेपथ्य में संकेत
भुक्त-त्यक्त-संचित कथावशेष
रंगावतरण जब होगा तुम्हारा
लीला पर क्या प्रभाव होगा तुम्हारा?

तुम ही कथा-कथक हो
इच्छा, ज्ञान, कर्म के
व्यूह में ग्रसित से
तुम व्यूह के जनक हो

गति में स्तिथि, कोलाहल में शान्त
युद्ध में तठस्थ, भ्रम ज्ञान-अज्ञान
रति रमण करती घट-पट भ्रमण करती
रूचता ठहरती, जचता टहलती

है आरंभ-अंत क्या?
महानाटक के परिप्रेक्ष्य में
है पात्र का महत्व क्या?

हर पात्र का चरित्र है
भाव से, कार्य से
हर मुक्त राग युक्त है
भैरवी की ताल से

© Ratish
Didcot 21st Nov 15

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