November 25, 2022

Readings: यजुर्वेद 36 18 मा मित्रस्य मा चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम्

दृते दृँह मा मित्रस्य मा चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम् । मित्रस्याहञ्चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षे । मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे ॥
यजुर्वेद - अध्याय » 36 मन्त्र » 18

May all the beings see a friend in my eyes. May I see friends in the eyes of all the beings. May we all see each other as friends, in this make us determined. 

#Yajurved #यजुर्वेद 

© Ratish

November 23, 2022

आओ! अवध में आओ राम


आओ! अवध में आओ राम

हमको अवध बनाओ राम
अपनी दया दृष्टि से
दृश्यभेद मिटाओ राम

आओ! अवध में आओ राम
वैदेही को भी लाओ राम
वामांग का रिक्त स्थान
सिया से सजाओ राम 

आओ!अवध में आओ राम
लीला वही दिखाओ राम
नर-ब्रह्म के ऐक्य का 
मार्ग फिर दिखाओ राम

आदर्श पुत्र, आदर्श शिष्य
आदर्श भ्राता, आदर्श मित्र
शौर्य, शील, शास्त्र, में पूर्णकाम
जय रघुनंदन जय सियाराम

रण दुर्धर स्वजनानुरागी
राजा, परमात्मा, बैरागी
शत्रुदल समूल संहारी
राम रामापति त्रिपुरारी

हनुमत बसे हैं बह्मलीन
सीता बिना सब श्री विहीन
भक्तों के भवविध्न त्राण
अवध में बस जाओ राम

जहां राम वहीं अवधधाम
नमस्कार्य को है प्रणाम
सीता शक्ति से स्पंदित नाम 
श्रीराम जय राम जय जय राम

रतीश
21-23-Nov-22
#अयोध्या - #वाराणसी 

#राम #सीता #अवध 

© Ratish