December 25, 2019

Readings: Brihadaranyaka Upanishad Verse 4.4.5

अथो खल्वाहुः काममय एवायं पुरुष इति; स यथाकामो भवति तत्क्रतुर्भवति, यत्क्रतुर्भवति तत्कर्म कुरुते, यत्कर्म कुरुते तदभिसंपद्यते


बृहदारण्यक उपनिषद् Verse 4.4.5


You are what your deep, driving desire is. As your desire is, so is your will. As your will is, so is your deed. As your deed is, so is your destiny

  #Brihadaranyaka #Upanishad Verse 4.4.5

December 14, 2019

Poem - Yaar main hoon यार मैं हूँ


फिर अपनी बात कहने को
तैयार मैं हूँ
तू है उस पार तो
इस पार मैं हूँ

बता सकता हूँ मैं सब कुछ
यहाँ से वहां तक
वहां से यहाँ तक भी समझता हूँ
समझदार मैं हूँ

ना जाने ये दूरी कैसी है
तुझमे - मुझमे  क्या पता
जो सुनाई देती है तुझे
वो  पुकार मैं हूँ

मुझे साथ लेकर चलता है
तू आदतन
तेरी यादों की गलियों का
अब भी यार मैं हूँ
 
© Ratish
14th Dec 2019