December 16, 2018

Hindi Poem न दैन्यं न पलायनं Na Daynyam Na Palayanam



दैन्यं पलायनं

  

धर्मयुद्ध है नहीं
जो नियमों का अनुसरण हो
जय ही ध्येय है
सतत लक्ष्य का वरण हो

समर वेला का आगमन है
प्रतिद्वंदि व्यूह गढेगा
साम दाम दन्ड भेद
चाल भी चलेगा

प्रतिपक्ष, अस्त्र, शस्त्र, नायक
दाक्ष्य का आकलन हो
यौधेय, सैन्यरचना, संसाधनों से  
प्रत्युत्तर का चयन हो

यह कौतूहल नहीं रण है
राष्ट्र के भविष्य को साधने का क्षण है
न दैन्यं न पलायनं
पुनश्च आज यही प्रण है
 

© Ratish
Pune
16th Dec 2018

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