न दैन्यं न पलायनं
धर्मयुद्ध है नहीं
जो नियमों का अनुसरण हो
जय ही ध्येय है
सतत लक्ष्य का वरण हो
समर वेला का आगमन है
प्रतिद्वंदि
व्यूह गढेगा
साम दाम दन्ड भेद
चाल भी चलेगा
प्रतिपक्ष,
अस्त्र,
शस्त्र,
नायक
दाक्ष्य का आकलन हो
यौधेय, सैन्यरचना, संसाधनों से
प्रत्युत्तर का चयन हो
यह कौतूहल नहीं रण है
राष्ट्र के भविष्य को साधने का क्षण है
न दैन्यं न पलायनं
पुनश्च आज यही प्रण है
© Ratish
Pune
16th Dec 2018