अटल
हो गया अस्त
दिनकर सा नर महान
दिनकर सा नर महान
अंतस में है शेष
तेरी वत्सल स्मृति मात्र
तेरी वत्सल स्मृति मात्र
संघर्ष पथ तुमसा
सहज ही चुनता है कोई?
ध्येय पर तुमसा
दिगांत चलता है कोई?
सहज ही चुनता है कोई?
ध्येय पर तुमसा
दिगांत चलता है कोई?
तुम कर्म हो,
तुम काव्य हो
तुम ओज हो, तुम भाव हो
शकुनियों की बिसात में
तुम “राज धर्म” की आवाज हो
तुम ओज हो, तुम भाव हो
शकुनियों की बिसात में
तुम “राज धर्म” की आवाज हो
माँ भारती के सुविशिष्ट पुत्र
तुम अपराजित अजातशत्रु
ध्वस्त किये रण-व्यूह दल
रह कर अटल, बन कर अटल
© रतीश – पूना
तुम अपराजित अजातशत्रु
ध्वस्त किये रण-व्यूह दल
रह कर अटल, बन कर अटल
© रतीश – पूना
17th
Aug 2018