March 10, 2018

जिंदगी का पेड़ - Hindi Poem

मेरी जिंदगी का पेड़ है
जड़ों से अपनी जुडा़ हुआ
हवा की मौजों में झूमता
तन्हाँ कहीं पे खडा़ हुआ

न जाने क्यों मैं हूँ यहाँ?
            न जाने कैसे बढ़ गया?
पानी को नीचे खोजता
            कब आसमाँ पे चढ़ गया

कभी ओस में, कभी धूप में
            कभी गिलहरियों की थाप से
कभी पूछता, कभी सोचता
            क्या हो रहा चुप चाप मैं

ये चिड़ियों का धौसले बनाना
            ये मौसमों का आना जाना
आने लगा था समझ कुछ कुछ
            तेरा ये तौर और मेरा मुस्काना

मैं शहद हूँ, कोयल हूँ मैं
            खाद हूँ, मैं ही हूँ आसरा
जिस तरह से मैं तेरा हूँ
            वैसे तू भी है मेरा

रतीश – पूना  March 2018
© Ratish

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