श्वेत श्याम अश्वों से तुझे खींचा गया
मंथन के गरलामृत से फिर तुझे सीचा गया
पटल पर उठ रहा है निरंतर विचार
इस कथा के तुम स्वयं हो सूत्रधार
झर रहा है कण कण यह अमूल्य रत्न
हो सजग, हो सहज, हो अद्वय कर यत्न
© Ratish
मंथन के गरलामृत से फिर तुझे सीचा गया
पटल पर उठ रहा है निरंतर विचार
इस कथा के तुम स्वयं हो सूत्रधार
झर रहा है कण कण यह अमूल्य रत्न
हो सजग, हो सहज, हो अद्वय कर यत्न
© Ratish
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