August 16, 2012

माँ भारती Pride of Lion - Hindi Poem

तुम तो माँ हो, सब कुछ सहती हो
संतानों का फिर भी सम पालन करती हो

हो सहस्त्र श्वान कपूत एक सिंह उस पर भारी
नरसिहों ने दी आहूति तुझे है बारी बारी

है वहनियों में सिंह रक्त सभी को दिखला दो
गर्जन से अपने इस व्योम को भी दहला दो

उठो और माता के चरणों को धो दो
रहे पल्लवित धरा ऐसे बीजों को बो दो

माँ भारती का कर स्मरण अपने मन में
कर्तव्य पथ पर बढ़ चलो इस जीवन में

जब तक तुम हो माँ का ऊँचा शीश रहे
रहे फैलता दशदिक् उनका आशीष रहे

आए हैं नरसिंह और अभी अनंत आयेंगे
तेरे चरणों में जो अपनी आहूति दे जायेंगे

© रतीश पण्ड्या

15th Aug
UK


August 05, 2012

सूत्रधार

श्वेत श्याम अश्वों से तुझे खींचा गया
मंथन के गरलामृत से फिर तुझे सीचा गया
पटल पर उठ रहा है निरंतर विचार
इस कथा के तुम स्वयं हो सूत्रधार
झर रहा है कण कण यह अमूल्य रत्न
हो सजग, हो सहज, हो अद्वय कर यत्न


© Ratish

Today I am

I am another strand
Of the chalk grassland
The wind moves me
And passes right through me
I rustle, sway and feel content

 

The sun warms my face
Clouds indulge in a race
The bees flits across
Birds flock and swim by

Others walk by me leaving no trace

Today I was
Just a grass
And was a witness
To all that passed
The sun, clouds, wind and birds

© Ratish
5th Aug
Ridge way 
UK