July 29, 2012

रण कौशल Under the 5 circles dedicated to Olympians - Hindi Poem

तूणीर में अभी है बाँण बाकी
अस्तमान है सूर्य
अंधकार ने घेरा नही है
इस देह में है अभी प्राण बाकी
ध्येय है अपूर्ण
रण में विरोधी है सबल
व्यूह उसका तूने तोडा नही है
है धनुष की तेरे अभी टंकार बाकी
प्रश्न है कौशल पे तेरे
क्या तेरा अनुसंधान है
धैर्य है कितना
और साहस का क्या प्रमाण है
है काल की पुकार
तुम युद्ध में बढ चलो
मोड कर इस समर को
गौरव गाथाएँ गढ चलो

© Ratish


UK Olympics

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