Random life experiences that touch me enough to acknowledge through writing or images
February 18, 2025
सुपुर्देखाक
तेरी गली में आए भी
दीदार भी हुआ
गोया कुछ ऐसा खो गया
कि कुछ भी नहीं रहा
इक आखरी दीदार भी
करके आ गए
मिट्टी को सुपुर्देखाक
करके आ गए
© Ratish
18 Feb 25
February 10, 2025
पूछ मत
तुम्हें
क्या
मिला मुझे क्या पता
मुझे क्या मिला ये पूछ मत
मैं चिराग सा अब भी जल रहा
तेरी नज़र का असर पूछ मत
© Ratish
10 Feb 25
जाने क्यों दे दिये तुमने
जाने क्यों दे दिये तुमने
अपने कुछ पल
वो हसी, वो यादें
वो बेपरवाह अदाएं
वो बातें,
वो नसीहतें
वो अपनेपन का एहसास
जाने क्यों दे दिये तुमने...
इनके लायक मैं कभी था ही नहीं
© Ratish
10 Feb 25
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