November 22, 2023

Hindi Poem - पराजय On Defeat in 2023 CWC Final

On defeat in in 2023 CWC final 



पराजय ! क्यों हुए विजित?
स्तब्ध-द्रवित मन, नीरस जीवन
स्वर्णिम स्वप्न दर्पण हुए ध्वस्त
यश सूर्य तिमिर में हुआ अस्त

विश्लेषण,अन्वेषण का चला दौर
अंगुलियाँ उठी निमित्त की ओर
व्यथित-मुदित जन भावानुसार
अंतिम समर - बड़ी जीत, बड़ी हार

है विजय की जब कामना 
तो हार भी स्वीकार्य है
फिर उठो, फिर लड़ो
ये ही मंत्र शिरोधार्य है

स्वयं को बदल कर
हार के निमित्त को बदलना है
नये शस्त्रों, नये व्यूहों,
नये योद्धाओं को गढ़ना है

 समर कोई, रण कोई
अंतिम नहीं होता
अजेय बनना प्रक्रिया है
ये घटनाक्रम नहीं होता

पुरुषार्थ से ध्येय के
संधान में लगे रहो
परिस्थितियों से भिड़ो 
उत्थान में लगे रहो


© Ratish
२२-११-२३ बिलासपुर 

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October 23, 2023

Reading:अकृत्रिममनाद्यन्तं देवनं देव उच्यते


न देवः पुण्डरीकाक्षो न च देवस्त्रिलोचनः | न देवो देवरूपो हि न देवश्चित्तरूपकः | अकृत्रिममनाद्यन्तं देवनं देव उच्यते| 


न  शिवेन विना शक्तिर्न शक्ति रहितः शिवः  उमशङ्करयोरैक्यं यः पश्यति स पश्यति 
रसो वै सः

चर्माम्बरं च शवभस्मविलेपनं च 
भिक्षाटनं च  नटनं च परेतभूमौ 
वेतलसन्हतिपरिग्रहिता च शंभोः 
शोभां वहन्ति गिरिजे तव साहचर्यात्  





© Ratish

August 24, 2023

Hindi Poem: चंद्रयान chandrayan

सोमाग्नि के मध्य स्थित अविरल

अत्भुत योग भोग जल अनल

हो अंतर्मन या हो विश्वपटल

सम्यक है नृत्य नर्तक युगल

विज्ञान भैरव तंत्र यंत्र रण 

पृथ्वी से सहत्रसार आरोहण

© रतीश

24 Aug 23



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