सत्याधारस्तपस्तैलं दयावर्ति: क्षमाशिखा।
अंधकारे प्रवेष्टव्ये दीपो यत्नेन वार्यताम्॥
जब अंधकार प्रवेश कर रहा हो तब जो दीप हम यत्न पूर्वक जलाएं उसका आधार सत्य का हो, उसमें तेल तप का हो, उसकी बत्ती दया की हो और उसकी लौ क्षमा की हो।
When the darkness is entering then the lamp we should laboriously light should have foundation of truth, oil of austerity, wick of compassion and flame of tolerance.