December 25, 2021

Hindi Poem हिन्दी कविता: पुल

फिर मैं पुल पे चल रहा था
कभी रेत कभी पानी पे छाया
पंछी बसे पानी और नभ में
मिलती ही है यथार्थ से माया

जब पक्षी सतह पे उड़ते
बिम्ब प्रतिबिम्ब हमें दिखता
ऊंची अगर ये उड़ान हो तो
जाएगा कहां बनके ये साया
                                  रतीश
                                  25 Dec 21


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