तेरा साया क्यों है मेरे ऊपर
उठ गया तो भी कहां जाएगा
संग हैं तेरे तो समा है यहां
इसके जाने का वक्त आएगा
हर घड़ी बेसुध क्यों न रहें
कल न महफ़िल न साकी हो
वक्त तो आता जाता रहता है
सांसें किसमें कितनी बाकी हो
रतीश
बिलासपुर
24 October 21
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