November 21, 2020

Hindi Poem - सांसें आग सी बना लो

बिन कुछ किये भी 

    धूल जमती रहती है 

सासें भी लय के बीच 

     थमती रहती है 

करते हैं हम जो जमा 

    ये कपड़े  लत्ते सब 

बनेंगे ये कूड़ा कर्कट 

    ये पोथी पत्रे  सब 

न जाने कौन कहाँ से

    आया है क्यों हमारे पास 

न जाने कब तक रहेगा 

    ये सब हमारे पास 

हो सके तो भुला दो 

    ये धूल, मिट्टी, मल 

सांसें आग सी बना लो 

    जीवंत, निश्चल, कांत

© Ratish

पूना 

17th Nov 2020

#HindiPoetry #हिंदी #कविता

November 01, 2020

Couplets उसने मुझमें कभी कोई कमीं नहीं देखी

न धुआं देखा है न रौशनी कभी देखी
कैसे रिंद हो जिसनें मयकशी नहीं देखी
ये कैसा इल्म है जो दायरे में ही रखे
किताबी लकीरों ने कभी जिंदगी नहीं देखी

जिसका दीवाना कहलाने का तुझे गुरुर है
जिसकी गुस्ताखी मेंं तुझे कुछ गवारा नहीं
मुझे खुद सा मानता है वो यार मेरा
उसने मुझमें कभी कोई कमीं नहीं देखी

तेरे खयाल, सोहबत और कमी
के बिना धडकनेंं भी बजती नहीं
जाने क्या खलल है मेरी निगाहों मेंं
हर बुत मेंं तेरी रौशनी नहीं देखी

रतीश
पूना
31 Oct 2020

© Ratish